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हलासन (Plough pose)



अभ्यास : आराम से लेट जाये, दोनों हाथों को दोनो पैरों के समानान्तर रखें। दोनो पैरों को एक साथ कमर से उठाकर, धीरे-धीरे अपने सिर की तरफ ले जायें, सिर के पीछे, दोनो पंजो से आसन (फर्श) को सिर के ठीक पीछे छूने का प्रयास करें, इस दशा में दोनो हाथ यथावत रहे। थोडी देर बाद विश्रामावस्था में आ जायें, इस अभ्यास को 3-4 बार करें।

नये अभ्यासियों के लिये यह अभ्यास आसान नही है, क्योकि उनके शरीर में प्रयाप्त लोच नही होता है, अतः अत्यन्त सावधानी से जितना पैर झुक सके उतना ही प्रयास करें, धीरे-धीरे स्वंय ही पैर सिर के पीछे फर्श को स्पर्श करने लगेगा, जोर लगाकर कभी भी इस अभ्यास को ना करें अन्यथा गले में मोच आ सकती है, इस श्रेष्ठ अभ्यास को ‘हलासन’कहते है।


halasan yoga plough pose

लाभ : नियमित रूप से अभ्यास करने पर चेहरे की रंगत बदल जाती है। चेहरे में अपूर्व चमक, लालिमा आ जाती है, ऐसा रूप, सौन्दर्य, प्रसादनों से कदापि प्राप्त नही होता है। ‘हलासन’ से, गले के, ऊपर के सभी अंगो को भरपूर पोषण मिलता है, रक्त संचार से चेहरे पर लालिमा, चमक-दमक शीघ्र आ जाती है ।

मस्तिष्क को उचित पोषण मिलने से, मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल मिलता है, गला, नेत्र, कंधे, पीठ, उदर क्षेत्र, सभी निरोग होते है। हदय के लिए यह अभ्यास महालाभकारी सिद्ध होता है, हदय को पूर्ण रक्त मिलने से सभी प्रकार के हदय विकार नष्ट होकर, बल मिलता है। वक्षों को विकसित एवं पुष्ट करता है, कमर लचीली एवं पैरों का दर्द नष्ट होकर सुन्दर बनते है।


सावधानी : यह एक कठिन अभ्यास है, बढ़े हुये पेट वालों से यह शीघ्र नही होता, अतः घबरायें नही धीरे-धीरे जितना हो सकता है उतना ही करें, शीघ्रता या झटके से कदापि न करें। रीढ़ की हड्डी विकार में या पेट, गर्भाशय या उदर क्षेत्र में कही शल्य हुआ हो, वे इसका अभ्यास बिना चिकित्सक, योग प्रशिक्षक के सलाह के न करें।


Yoga demonstrated by -  Ajay Srivastava (DNYS, MD-AM)


Note: Always follow Precautions while performing yoga. Click the link below.

Niyam,Savdhaniya for yoga practitioner







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